कान्हा तेरे इंतजार में



जोग ले लिया जोगनियां बनी 
कान्हा तेरे इंतजार में 
कभी मीरा बनी कभी राधा बनी 
ओ कान्हा तेरे प्यार में 
माखन मिश्री और दही की 
सर पर लेकर मटकी 
माखन चोर छुपकर बैठा
वन वन फिरू ढूंढ़ती 
गिरधारी बनवारी सुन लें 
तू ही तो मनमीत मेरा
सात सुरो का संगम बांसुरी
तू ही तो संगीत मेरा 
जन्म जन्म से फिरु भटकती 
जीवन डोर तुझी से बांधी
दर्शन की ये अंखियां प्यासी 
सुन लें ओ घट घट के वासी 
दरस दिखा जा प्यास बुझा जा 
प्रीत लगा जा तू मुझसे 
कब से बैठी यमुना किनारे
राह निहारू सांझ सकारे
इंजतार में हिम्मत हारी 
तन मन धन तुझ पर वारी
अब तो दर्शन दो घनश्याम 
जीवन शाम होने को आई 

नेहा धामा " विजेता " 
बागपत , उत्तर प्रदेश

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