मेरी सखी रश्मि



  जाने क्यों इतना बदल गई तुम रश्मि 
पहले तो मुझसे बड़ा प्रेम किया करती
छोटी छोटी बातों में रूठ जाती हो 
जितना तुम्हे मनाऊं उतना दूर जाती हो
कभी किसी बात पर जब मैं दुखी होती 
तुम मुझे बड़े प्यार से समझाती थी 
प्यारी प्यारी बातें किया करती थी
अब क्यों बिन बात चिड जाती हो
मेरी बात का जवाब नहीं देती हो 
मेरी हर बात गलत नजर आती है
इतनी मुश्किल से एक सखी मिली 
वो भी नाराज हो मुझसे कहीं खो गई
एक बार बता तो सही मैने क्या किया
जो तुमने इतना दर्द मुझको दिया 
सांझ होते ही तेरा इंतजार करती हूं 
बार बार मोबाईल की तरफ देखती हूं
तेरा फोन आया या कोई मैसेज आया 
मायूस हो जाती हूं जब कुछ ना पाया 
माफ़ी दे मुझे गर कोई गुनाह किया हो
वो दोस्ती वो प्यार फिर से लौटा दो 
तेरे बिना अधूरी सी मेरी जिंदगानी है 
कितनी बातें बाकी जो तुझसे कहनी है 
नेहा धामा " विजेता " बागपत , उत्तर प्रदेश

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