सपनों का घर


सपनों के घर में मेरे,ना कोई कमी हो
बस प्यार ही प्यार हो,कभी आँखों में ना नमी हो
हो चाहे कैसा भी दिन, हर कोई संग हो
अपना एक आसमाँ,अपनी एक ऐसी जमीं हो

 मुस्कुराकर मिले हर कोई,न रखे कोई बैर
 गमों के बीच भी जहाँ,खुशियों की हो जाए सैर
 हो जाए हर समस्या हल, न रहे कोई मुश्किल
 जब भी लगे दुखों का ताँता, पूछे सब सबकी ख़ैर

बंध जाए बातों-बातों में ही, अनोखा संबंध अपनेपन का 
न रहे कोई दूरी,न पहरा हो किसी बंधन का
 जुड़ा हो जहाँ रिश्ता बस दिल का दिल से ही 
न रहे विष की बूँद मात्र भी,चाहे हो कितना भी रिश्तों का मंथन

 स्वरचित एवं मौलिक
सुनीता कुमारी अहरी

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