राष्ट्र सुरक्षा या मनभेद एनएसए"



राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980" रासुका, देश की सुरक्षा के लिए सरकार को   अधिक शक्ति प्रदान संबंधित कानून है! 
यह कानून केद्र,  और राज्य सरकार को गिरफ्तारी का संदेश देता है! 
जब 1980 में लागू हुआ तो उस समय इसकी अवश्यकता देशद्रोहीयो के लिए कारगार सबित हुई, पर समय के साथ इसमें कुछ बदलाव हुए "
आज के समय में इसे कानून के कुछ राजनितिज्ञ जो की खुद कानून की धज्जियां उडाते है! हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं! 
हलाकिं इसे राष्ट्र की सुरक्षा के उद्देश्य से प्रस्तावित किया गया था! 
इसे कानून के तहत गिरफ्तार किसी व्यक्ति कोतीन सप्ताह के अंदर, सलाहकार समिति के  सामने उपस्थित करना होता है! 
साथ ही सरकार  या गिरफ्तार करने वाले अधिकारी को, यह भी बताना पडता है, की उसे क्यूँ गिरफ्तार किया!
सलाहकार समिति उपलब्ध कराऐ,गये तथ्यों के आधार पर विचार करती है! 
या नये तथ्य पेश करने की पेशकश करती है! 
सुनवाई के बाद समिति को सात सप्ताह के भीतर सरकार के समक्ष रिपोर्ट पेश करना होता है! 
सलाह बोर्ड को अपनी रिपोर्ट में साफ शब्दों में लिखना होता है!
गिरफ्तारी के जो कारण बताऐ गये हैं, पर्याप्त है या नही, यदि सलाहकार समिति के सदस्यों के बीच मतभेद है,  तो बहुलता के आधार पर  निर्णय माना जाता है! 
सलाहकार बोर्ड से जुड़े किसी मामले में, गिरफ्तार व्यक्ति की ओर से कोई वकील पक्ष नही रख सकता! और सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट गोपनीय रखने का प्रावधान है! 
पहले तीन महीने के लिए गिरफ्तार किया जाता है, तीन चरणों में आगे भी गिरफ्तारी बढाई जा सकती है, जिसकी समय सीमा 9 महीने से 12  महिने भी हो सकती है! एक बार में तीन महीने से ज्यादा अवधि नही बढाई जा सकती है! 
रासुका के ताहत किसी भी नही सदिग्ध व्यक्ति को बिना आरोप के 12 महीने तक जेल में रखा जा सकता है! 
इसमें सिर्फ राज्य सरकार को सूचित करने की आवश्यकता है! 
की एन एस ऐ के तहत, व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है! 
हिरासत में लिया गया व्यक्ति, हाईकोर्ट के सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपील कर सकता है! लेकिन उसे मुकदमे के दौरान वकील की अनुमति नही होती! 
यह कानून राष्ट्रीय सुरक्षा में बाधा डालने के लिए है"अर्थात, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980, देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से संबंधित कानून है! 
इसमें अपराधी को किसी से मिलने की मनाही है! इससे अपराधी भी कही न कहीं सुरक्षित होता है! उसकी सारी जानकारी गुप्त रखी जाती है! यदि वो सच में देश द्रोह में लिप्त पाया जाता हो तो कार्यवाही आगे बढा दी जाती है, 
यदि उसका पक्ष मानवता भरा होता है! तो सलाहकार बोर्ड नरमी बरतता है! 
जब गिरफ्तारी के कारण पर्याप्त नहीं होते, तो गिरफ्तारी रद्द हो जाती है!  अपराधी व्यक्ति को रिहा कर दिया जाता हैं!!  यह लेख वकीलों से विचार विमर्श से तैयार किया गया है! 

श्रीमती रीमा ठाकुर 

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