धड़कनें सुन रही हो



"बैठा था शान्त समुद्र सा, जाने तू कहाँ से हैं आई।
तेरी आँखों की शरारत, मेरे इस दिल में है समाई।।

एक झलक बस देखा तुमको, दिल में हलचल मचा गई।
तेरी खूबसूरत नशीली आँखे मेरे मन को भा गई।।

निज कर स्पर्श से अधखिली कली  को खिला फूल बना गई।
तेरे अंग-अंग से निकली जो खुशबू, मेरे तन-मन को महका गई।।

तेरा सुन्दर अक्स जो मेरे दिल में उतर गया ।
आँखें खुली हो या बन्द तेरा चेहरा नजर आया ।।

तुम्हें देखूँ तो मेरी आँखें झुक जाती हैं।
जो नहीं होती पास तो साँसें रुक जाती हैं।।

ये कैसा नशा सा छाया तेरा, 
कांपते होंठ धड़कनें सब कह जाती हैं।।

कब से चाहत जगी इस मन में कहने से घबराता हूँ।
सुनूँ तुझे, मैं देखूँ तुझे बस ख़्वाबों में कर पाता हूँ।।

अब तो कल्पना में ही तुम्हीं महसूस हो रही हो,
लगकर नेहा कलेजे से तुम धड़कनें सुन रही हो।।"



नेहा धामा " विजेता "
 बागपत , उत्तर प्रदेश

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