यह प्यारा बरगद का पेड़


कितना विशाल बरगद का यह पेड़ होता है।
जहां भी यह पनप जाए, फिर पीढ़ी दर पीढ़ी यादें संजोता है।

मां के पूजा पाठ को,रक्षा कवच में पिरोता है।
बच्चों के अनगिनत झूले,यह हवा में झूलाता है।

इतना गुणकारी होकर भी,क्यों यह अपना अस्तित्व खो रहा है।
क्यों आजकल के समाज से,विलुप्त यह हो रहा है।

बूढ़ा होकर भी , ताकतवर यह रहता है। 
बनो मेरे जैसे, हर व्यक्ति से यह कहता है।

इस दिखावे की दुनिया को छोड़कर,अंदर से मजबूत बनो।
छोड़कर इस दिखावे को,बरगद का पेड़ तुम बनो।

क्या रखा है दिखावे में,जब नींव ही मजबूत ना होगी।
मजा तो तब है जीने में,इस जमाने में जब मनुष्य की नींव बरगद जैसी होगी।

अपने परिवार की हर जड़ को,बरगद के जैसा मजबूत कर लो।
टूट ना पाए परिवार की कोई डाली, इतना प्यार हर डाली में भर दो।

- नीति अनेजा पसरिचा
   रुद्रपुर,उत्तराखंड

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