लीलाधर



टेडी मेड़ी बातों से क्यों
मुझको बड़ा सताते हो 
थोड़ी सी भी फ़िक्र नही 
मुझकों बड़ा रुलाते हो 
नाम तुम्हारा लीला धर 
नित लीला दिखाते हो 
पल में गुस्सा पल में प्यार 
मीठी बातों में फसाते हो
बन जाऊं कितनी होशियार 
फिर आ जाती तेरे झांसे में 
कितना भी नाराज हो जाऊ 
कभी ना मुझको मनाते हो 
तेरे उलाहनों से तंग आकर 
रोऊ मैं दूर बैठ मुझें निहारे 
चुपके से आकर कानों में 
मुरली मधुर बजाते हो 
नेहा धामा " विजेता " बागपत , उत्तर प्रदेश

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