बधाई

एक संस्मरण-
हमारी भाभी सा ने पहली बार रसोई कार्य प्रारंभ किया। गांव मोहल्ले के लोगों ने यथाशक्ति उपहार दिया और बधाइयाँ भी दी.. । भाभी ने हमसे कहा-"अपने भैया को भोजन लेते जाइये बरामदे में। 
जी  पूछकर आती हूं ..।
मैं पूछती उससे पहले ही भैया बोल पड़े-तू चल मैं अंदर जा कर खा लूंगा । 
बधाई हो..! अब मेरी ड्यूटी खत्म, आज से भैया आपके हाथ की बनी डिश खाएंगे। वो अंदर आ रहे हैं। 

अच्छा सुनिये! क्या-क्या परोस दूं उन्हे? भाभी ने हमसे कहा!

आपकी मर्जी, जितना बना है सबकुछ थोड़ा-थोड़ा..हाँ बैगन का भर्ता मस्ट है उनके लिए। 
और रात का   दूध मलाई सहित ।
हमने शरारत करते हुए कहा ,क्यो कि भैया को इन दोनों ही चीजों से उल्टी  आने लगती है। 

फिर भाभी ने भैया को भोजन कराया, वे सबकुछ खा लिए, बैगन भर्ता के सिवा। कुछ नहीं बोले। 

और मैं  फिर बताना भूल गई ,और अपने काम में लग गई ।

फिर रात में भाभी मलाई वाला दूध भी ले गई। 

मैं  टेप में कैसेट चेक कर रही थी इसलिए मै उन्ही के रूम में थी। 
भैया ने दूध पिया और ओइ...ओइ करने लगे ..

हटाओ ये .. पूछा होता हमसे .. कि मलाई ..?

भाभी सा ने मुझे  हैरत से देखा और बोल पड़ी -" बबुनी से पूछा है। 

" हं रे ते कहले ह..अइबे हेनहिया...।" भैया ने गुर्राते हुए कहा!

" बधाई हो ..फर्स्ट डिश है भाभी के हाथ का"  ..कुछ यादगार तो होना हीं  चाहिए ..।

दीजिये मैं पी जाऊं। 

कहिये तो कान पकड़ कर उठक-बैठक करूं मुझे बताना था पर मैं भूल गई। " 

"इसपे ट्रस्ट न करना ..कभी ...।"

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