सोच रही हूँ


सोच रही हूँ एक खत लिखूँ तुम्हें....!
मन में दबी सारी मौहब्बत लिखूँ तुम्हें....!!
 
क्या तुम पहचान पाओगें खत मेरा,
पता जो मैं मेरी कायनात लिखूँ तुम्हें....

जब भर जायेगा वो कौरा पन्ना आँसुओं से मेरे,
उन्हे अल्फाज़ या मेरे जज्बात लिखूँ तुम्हें....

सुनकर आवाज तुम्हारी मैं खो जाती हूँ तुम्ही में,
सकून का पल हो तुम या मेरे मन की बात लिखूँ तुम्हें....

पल- पल कैसे बीत रहा है जीवन
खबर नही मुझे,
सोच रही हूँ मेरी जरूरत लिखूँ तुम्हें....

         आरती सिरसाट
         बुरहानपुर मध्यप्रदेश

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