आँगन बाल कविता


बच्चों सुन लो एक कहानी
कहती थी जो मेरी नानी

बाग बगीचे वृक्ष घने थे
आंगन ही उपवन बने थे
निर्मल था नदियों का पानी
बच्चों सुन लो एक कहानी।

हम सब पर फिर स्वारथ छाया
कांक्रीट का जंगल बनाया
दूषित किया नदियों का पानी
वच्चो सुन लो एक कहानी ।

बच्चों अब तुम पेड़ लगाओ
वसुधा को फिर हरी बनाओ
व्यर्थ बहे न नलों का पानी।
बच्चों सुन लो एक कहानी। 
           कीर्ति वर्मा

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