आँखे


ख्वाइशें कहाँ पूरी होती हैं ?

झोपड़ी मे फली फूली
महलों में अधूरी होती हैं

ख्वाहिशें कहाँ पूरी होती है?

मुख मोड़ लेता है सहारा 
बूढ़ी आँखे बेज़ार रोती है 

ख्वाहिशें कहाँ पूरी होती है?

आसमाँ छूने की चाहत में
धरती पैरों की छूटी है

ख्वाहिशें कहाँ पूरी होती हैं?

मशहूर होने की तमन्ना
बहुत कुछ खोती है !!

ख्वाहिशें कहाँ पूरी होती है?

समुंदर सी बन अय कीर्ति
जिसकी लहरें सबको समोती हैं 

ख्वाहिशें कहाँ पूरी होती है? 

           -कीर्ति प्रदीप वर्मा

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