स्त्री : समानता का परिचय



मुस्कुराकर जिन्होंने हमें दी हमारी पहचान
स्त्री हूँ मैं कहकर पाया उन्होंने जग में सम्मान

साहस बनकर जिन्होंने नापा पूरा आसमान
स्त्री हूँ मैं दिखाकर बढ़ाया उन्होंने दुनिया में हमारा मान

बलिदान दे जिन्होंने इतिहास किया गौरवान्वित
स्त्री हूँ मैं जताकर उन्होंने स्त्री जाति को किया प्रतिष्ठित

सबल बनकर जिन्होंने सृष्टि को दिया आधार
स्त्री हूँ मैं ऊर्जितकर दिया उन्होंने नवजीवन का सार

अग्नि में तपकर जिन्होंने खुद को किया नित दिन बेहतर
स्त्री हूँ मैं कहकर उन्होंने समाज में  समानता का परिचय दे स्वयं अस्मिता बनाई नहीं जो किसी से कमतर
 स्वरचित एवं मौलिक
 सुनीता कुमारी अहरी

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