'कुछ अहसास'


जिंदगी तुम जब भी मेरे घर आना
तो कुछ अहसास लेती आना
मेहनत, प्रेम, दया, करुणा
और विनम्रता का भाव उनमें लाना 
जिंदगी तुम जब भी मेरे घर आना
तो कुछ अहसास लेती आना....

कमी ना पड़ जाए कभी इनकी
इसलिए थोड़े और लेती आना
जिंदगी तुम जब भी मेरे घर आना
ना हो उदास नहीं करूंगी तुम्हें निराश
रखूंगी इन्हें संभाल कर सदा अपने पास
जिंदगी तुम जब भी मेरे घर आना
तो कुछ अहसास लेती आना.....


ले आना थोड़ी सी मुस्कुराहटें भी
कर देना थोड़ी सी और
कर्तव्य और निष्ठा की बरसात
कुछ करने के जज्बात भी साथ लाना
जिंदगी तुम जब भी मेरे घर आना
तो कुछ अहसास लेती आना.....

बड़ों का स्नेह और आशीर्वाद भी साथ में लाना
जिनके बिना होगा ना पूरा कोई कार्य
ईश्वर की कृपा को देखो भूल मत जाना
जिंदगी तुम जब भी मेरे घर आना
तो कुछ अहसास लेती आना.....

द्वेष, अभिमान, पाखंड, बेईमानी
इनको छोड़कर कर आना
विश्वास,और मानवता को साथ में लाना
जिंदगी तुम जब भी मेरे घर आना
तो कुछ एहसास लेती आना
जिंदगी तुम जब भी मेरे घर आना......

कविता गौतम...✍️

Comments

Popular posts from this blog

आज की मांग

आखिरी अदालत

सुनहरी यादें