गरीब का सपना
सभी बच्चे समय पर स्कूल पंहुँच गए थे। प्रार्थना की घंटी बजते ही सभी बच्चे स्कूल के मैदान में पहुंच गए।
प्रार्थना शुरू हुई:-
बच्चे गा रहे थे:-" हम हैं छोटे छोटे बालक।
ईश्वर आप जगत के पालक।"
माँ कहती है -"ईश्वर ही सम्पूर्ण जगत का पालन करते हैं । माता पिता हैं हमारे तो वे अपनी संतानों में इतना भेदभाव क्यों करते हैं?"
कोई बहुत धनवान तो कोई बहुत गरीब क्यों होता है? जिस तरह ये बच्चे स्कूल में पढ़ रहे है उसी तरह मैं भी पढ़ना चाहती हूँ किन्तु माँ-बाबा के पैसे नहीं हैं हम गरीब जो हैं। बाबा कहते हैं ये सब अमीरों के भाग्य में होता है बिटिया ! हम गरीब अपना पेट पाल लें यही बहुत है।
आज बाबा की तबियत खराब है। माँ भी मालिक के यहाँ काम करते हुए गिर गई थी उसके हाथ की हड्डी टूट गई है। सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है उसका। भाई को बहुत भूख लगी थी मुझसे देखा नहीं गया इसलिए मैं आज भाई को लेकर आई और मालिक बड़े दयालु हैं मुझे मिट्टी ढोने का काम दे दिया।
इसी तरह भगवान भी हमारे ऊपर दया कर देते और माँ बाबू जल्दी से ठीक हो जाते तो कम से कम हमें खाना तो पेट भर मिल पाता। पढ़ना-लिखना सचमुच अमीरों के ही किस्मत में लिखा होता है।
नन्ही राधा अपने भाई का हाथ पकड़ पर मिट्टी का टोकरा सिर पर उठाकर ले जाते हुए सोच रही थी।
स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'
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