सवाल

मेरी इस कविता में एक छोटी बहन अपने बड़े भाई से प्रश्न कर रही है माता पिता के तलाक के बाद क्या क्या होगा ?
 

लग गई मोहर अदालत की , क्या सब कुछ दो हिस्सों में बंटना है ?

क्यों दिल के दो टुकड़े में भैया, अलग-अलग हमें अंटना है ?

न जाने किसके हिस्से में , किसका प्यार आएगा.........

आकर गले लगा लो भैया, फिर
 यह साथ न मिल पाएगा......

किसी के हिस्से मम्मी की लोरी, कोई पापा का कांधा पाएगा.....

क्या हम दोनों का साथ भी भैया,टूटे रिश्ते संग छूट जाएगा ?

हम दोनों ने क्या गलती की जिसकी सजा हमें मिलनी है....

जब पापा मम्मी समझ न पाए दूजा हमे कौन समझ पाएगा....

अभी हाथ पकड़ कर चल लो भैया ,फिर  यह हाथ न मिल पाएगा.......

आकर गले लगा लो भैया, फिर यह साथ न मिल पाएगा.......

अब तुम कभी नहीं रूठना भैया , मम्मी मनाने नहीं जाएगी ......

तेरी छोटी बहना भी , कहां पापा की झप्पी पाएगी .....

होकर बड़े तुम मिलने आना, छोटी बहन को भूल न जाना.....

राखी वाले दिन भैया तू कितना ज्यादा याद आएगा ......

आकर गले लगा लो भैया फिर यह साथ न मिल पाएगा......

स्वरचित :
पिंकी मिश्रा भागलपुर बिहार ।

Comments

Popular posts from this blog

आज की मांग

आखिरी अदालत

सुनहरी यादें