खूबसूरत है


खूबसूरत है.....
सात रंगों से सजा हुआ इन्द्रधनुष.....

खूबसूरत है.....
नदियों की कलकल करती आवाज.....

खूबसूरत है......
उदय होती प्रभाकर की किरण.....

खूबसूरत है......
क्षितिज पर ढ़लता आफ़ताब......

खूबसूरत है......
चाँद की शीतल चलन......

खूबसूरत है......
बरसात की बूंदें

खूबसूरत है......
वसुंधरा की हरी चादर

खूबसूरत है......
भोर को जगाती कोयल की वाणी......

खूबसूरत है.....
पवन की मनभावन लहर......

खूबसूरत है......
गाँव की मिट्टी की खूशबू.......

खूबसूरत है......
वन में नाचता मोर......

खूबसूरत है......
पेडों से लिपटी लताओं की डोर.......

खूबसूरत है......
तुम्ही से नारायण ये सृष्टि.......
क्योंकि.....तुम बसते हो प्रकृति के कण कण में......

             आरती सिरसाट
          बुरहानपुर मध्यप्रदेश
     मौलिक एवं स्वरचित रचना

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