ये आंखे'

'
मन का दर्पण होती हैं ये आंखे
खुशी और गम दोनों में 
छलकती हैं ये आंखे.....

मन के भावों को खामोशी से
बयां कर करती हैं ये आंखे
आयना मन का होती हैं ये आंखे.....

बिन कुछ कहे बहुत कुछ
कह जाती हैं ये आंखे
दुनियां के हर रंग रूप से 
वाकिफ कराती हैं ये आंखे.....

मन तक हर बात को सहजता से
पहुंचाती हैं ये आंखे
अच्छे और बुरे के भेद को 
बताती हैं ये आंखे.....

बहुत कुछ सोचने पर मजबूर 
कर जाती हैं ये आंखे
भावों को शब्दों में बदलने का 
हुनर भी रखती हैं ये आंखे.....

जागते हुए भी ख्वाब
दिखाती हैं ये आंखे
जिंदगी को खूबसूरत बनाती है ये आंखे....

कुदरत का अनमोल तोहफा होती हैं ये आंखे
अंधेरों को रौशनी से भरती हैं ये आंखे
रात में इक दिया जैसे होती हैं ये आंखे....

लेकिन ये सच है कि हम इनसे 
क्या देखना चाहते हैं
जिंदगी को खूबसूरत या
जहन्नुम बनाते हैं....

सही और गलत के भेद को 
क्या स्पष्ट कर पाते हैं
या गिरकर पर्दा इन आंखों पर
अनभिज्ञ बन जाते हैं.....

कविता गौतम...✍️

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