अहसास



न आज के हालातों से कीजिए हाल अपने खस्ता।
चलिए सजा ले आज एक अहसासो का गुलदस्ता।

बहुत नाजुक दौर है अभी  हौसला जरूरी है रखना,
किस मोड़ पड़ जाने जिंदगी बदल ले अपना रस्ता।

हर अहसास  के लिए मौजूद फूल रंग बिरंगे कितने,
गुलाब सुर्ख प्यार का कीमती पीला दोस्ती का सस्ता।

आज एहसासे दर्द बयां करना सजा से कम नहीं है,
जख्मों को कुरेद कर तो ये जहां है बहुत ही हँसता।

आप हैं साथ मेरे हर कदम है काफी बस इतना सुकूं,
कुछ एहसासों को छुपा कर मैने बंद का लिया बस्ता।

"बेफिक्र" बहा करते रहे हैं एहसासों की नदिया में हम,
मुस्कुराते रहे हैं चाहे कितने खंजर दिल में हो पैवस्ता।
~रंजन लाल "बेफिक्र"✍️

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