वनवासी राम

माता के हट को जान कर
अनुज संग चले भार्या को ले।
मुनि वेश पीताम्बर वस्त्र धर
पिता वचन की लाज धरी।

असुरों से मुनि रक्षा करने
संकल्प शीश निज आप धरे।
अहिल्या उद्धार करने को
वन गमन प्रस्थान किये ।

समय चक्र परिवर्तित हुआ
राम को राम बनाने की खातिर।
साधु वेष साधारण मानव
राज काज को छोड़ चले।

सिय सति अनुगामी पति की
शीश नवाकर साथ चली ।
लक्ष्मण सेवक बनकर पीछे
रक्षा करने वनगमन करे।
-----अनिता शर्मा सुधा नर्सिग होम झाँसी
-----मौलिक रचना

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