नादान दिल ‌‌



ये दिल तूँ फिर क्यों ऐसी इबादत कर रहा है......
इक बेवफ़ा से फिर क्यों तूँ मौहब्बत कर रहा है......

बिखरा बिखरा सा है हर एक पल तेरा
फिर क्यों तूँ सँवारने की झूठी हरकत कर रहा है......

मैं तो भुलने की कोशिश में हू उसे
फिर क्यों तूं यादों में लाने की शरारत कर रहा है......

देखकर तुम्हें वो तो अपनी नज़र कहीं ओर फेर लेता है
फिर क्यों तूँ बात करने की बात कर रहा है......

मान भी जा अब ऐ नादान दिल बार बार क्यों तूँ 
उसी से ख्यालों में मुलाकात कर रहा है......

           कु. आरती सिरसाट
           बुरहानपुर मध्यप्रदेश

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