मेरे इश्क़ के ख्यालात

मेरे इश्क़ के ख्यालात अब जेब नहीं देते,
पहले ही लूट चुके है अब फरेब नहीं देते,

करना चाहता हूं जिंदगी को फिर से शुरू,
पर  ये  दर्द को  देने  में  देर नहीं  देते,मेरे 
ख्यालात अब जेब नहीं देते,

हमारे  वक्त को  लूटते है  हर दम,उनकी 
याद में, काम में मसरुफ़  होना  चाहते 
तो है पर ये होने नहीं देते,

गुजरा हुआ दौर है ये समझकर भूलना
चाहते है मगर ये ख्याल रोज पैदा होते
और  जवां  जीते  है ,देते  है  दर्द  मुझे 
हद से ज़्यादा,, मुझे जीने नहीं देते है

मेरे ख्यालात  मुझे  पल पल मौत देते है
मैं मारना चाहता हूं और निजात चाहता
हूं इश्क के दर्द से,मगर ये ख्याल मुझे
मरने नहीं देते।

तेरी  यादों  को  भूलना चाहता हूं और 
चाहता हूं फिर से नई जिंदगी सुरु करू
मगर कमबख्त ये ख्यालात किसी का 
होने नहीं देते।

                               "कुमार"

Comments

Popular posts from this blog

आज की मांग

आखिरी अदालत

सुनहरी यादें