तुम चले आओ


अधूरे हैं तेरे वादे निभाने तुम चले आओ .....
मैं हूं तेरी जमाने को बताने तुम चले आओ.....

तुम्हारा नाम ले लेकर जपूं मैं प्रेम की माला..…
अंतिम घड़ी मुझको लिवाने तुम चले आओ.....

बेसुध पड़ी कब से तेरी चरणों में ओ गिरधर ....
हो जाए धन्य जीवन उठाने तुम चले आओ....

नहीं मैं राजरानी हूं मैं तो हूं बस तेरी राधा.....
बजाकर बंसी फिर से रिझाने तुम चले आओ.....

नयन में नीर भर कर तेरा मैं रास्ता देखूं ......
व्याकुल मन को धीर धराने तुम चले आओ.....

स्वरचित :
....... पिंकी मिश्रा
भागलपुर बिहार ।

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