प्रकाशमय


आकाशगंगा की शीतल छाया में
प्रेम की अविरलता का प्रमाण होगा

दीपोत्सव में संग हमारे संसार सागर
माधुर्य संगम स्थल का प्रसार होगा

कार्तिक मास के आमवस्य में
तल पर नभ का साक्षात्कार होगा

प्रेमरूपी दीपों से सुशोभित 
प्रकाशमय पृथ्वी लोक बार-बार होगा

रंगों की रंगोली से घर आंगन सजे
उत्साहित जग अपना परिवार होगा।


●नेहा यादव
स्वरचित रचना।

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