चाय


सोच रहे है धीरे धीरे तुमको अपना बना  ले, 
सोच रहे है.... धीरे धीरे तुमको अपना बना ले
हर वक़्त चाय में घुली हुई शक्कर की तरह तुम्हे अपना ले l

जैसे जैसे ये दिन शाम की चादर ओढ़ती है, 
वैसे वैसे ए "चाय" तेरी तलब होती है l

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