जादूगर कान्हा
जादू भरी आंखों से मोहन
तूने कैसा जादू कर डाला
कान्हा कान्हा रटती फिरे
कुंज गलियों में यह ब्रजबाला
नींद चुराई चैन चुराया
इशारों इशारों में कान्हा तूने दिल चुराया
प्रेम मिलन का अरमान जगाया
बैरी पिया फिर क्यों ना आया?
बैरी पिया फिर क्यों ना आया?
चढ़ जाऊंगी मैं प्रेम शूली
तेरी चाहत में भूली रे मैं सुध-बुध भूली
सुनी जबसे जादू भरी बैरन बांसुरी
हारी रे तन मन हारी ओ बनवारी ओ बनवारी
मैं हूं तेरी राधा प्यारी
मैं हूं तेरी राधा प्यारी ।
पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏💐💐
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