लड़की हैं हम
ये दुनिया थोड़ा खराब है, पापा ने बताया था,,,
हमने ना समझ होके उसे फिर भी अपनाया था.....
देखने की नजरिया बदल कर दुनिया को समझने क्या बैठ गए,,,
कमबख्त उंगली तो हम पे ही उठ गए.....
हम कंधो से कंधा मिला कर काम करने को चले थे,
लड़की हो कहकर लोगों ने दूर भगाए थे,,,
पुरानी रीत को पकड़के पैरों में बेड़ियां बांधने वाले,
ये क्या समझेंगे कभी लड़कियां भी अवल रहा करते थे...
लड़की की एक गलती करने पर सौ उंगलियां उठते हैं,,,
पता नही औरत की बाहर निकलने से लोग क्यों जलते हैं...
हम सर झुका कर खड़े हैं, तो कमजोर समझने की गलती मत करना,
हम लड़कियां हैं हमें पैरों का जूता मत समझना....
है हम में हिम्मत हम भी दुनिया को दिखा सकते हैं,,,
कलम चला कर पूरे देश में हम भी राज कर सकते हैं...
एक ही शरीर में हम कई रूप धारण करते हैं,,,
दिमाग से अंधे तुम क्या जानोगे हम कहां तक जा सकते हैं...
अच्छा है की नारी की सम्मान करो,
इज्जत दे रहे हैं तुम भी इज्जत दिया करो...
यूं उंगली उठा कर दोष न दिया करो,,,
जीने की अधिकार हमें भी है,
हम से अधिकार छीनने की कोशिश न करो....
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित:-
ज्योति महापात्र
ओडिशा
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