निकले है ग़जलों के सफ़र,,,

निकले  है  ग़जलों के सफ़र,,,
देखते है क्या क्या मिलता है,,,
मधु भरी  मुस्कां  मिलती  है,,,
या दर्द भरा कोई अल्फाज़  मिलता  है,,,

गीत  संगीत,,,बन  उपवन,,,
भंवरों की गुन्जन,,,फूलों का उजास मिलता है,,
मयूर का नृत्य,,चातकी का प्रेम,, मिलता है,,
और देखते हैं क्या क्या मिलता है

तोतों सी हरियाली,,,इंद्रधनुष सी शोभा न्यारी,,,
चारों तरफ है फुलवारी,,,नव पाल्वित बसंत,,
डारी डारी,,कोयल का मधु संगीत का राग मिलता है,,
देखते है क्या क्या मिलता हैं,,,

और ये क्या गजब हो आया है,,मधु सी प्यारी,,,
नायिका का यौवन का उन्माद,,झलक आया है,
आंखे है कजरारी,,, गेसुओं की घटा है चिंगारी,,
मद भारी आवाज़ में प्रेम उमड़ आया है,,,
देखते हैं गजल को नायिका में कोनसा राग नजर आया
है,,जो उसने जहां को भरमाया है,, चारों तरफ इस
चित चोर कनक कामिनी ने सबको उलझाया है,,,

निकले है गजलों के सफर पर,,,देखते है क्या क्या मिलता है,,,खुश नुमा शमा मिलता है या दर्द में डूबा जहां मिलता है,,,
      
                       नवीन कुमार

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