नैतिकता



पाव पडे की जीत है, अभिमानी की हार! 
मात् पिता की शरण में, मिलता है सुखमय संसार!! 
           🙏
शिव जटा से निकली गंगा, पाप मिटाने आयी! 
धरती को पावन करने, दु;खो को हरने आयी!! 
ये मानव तन है मिट्टी, माँ सरल सरस जलधारा! 
धवल धवल माँ गंगा, तारणहरिनी, संसारा!! 

भगीरथी कहलायी, भगीरथ के संग आयी! 
जन्मो की कठिन तपस्या, धरती माँ  फिर हर्षायी!! 
जब मिली तीन जलधारा, त्रिवेणी बन मुसकायी! 
तारे सारे पापी को, माँ पाप मिटाने आयी!! 

हर बार करे सब दूषित, फिर भी क्षमा करती है! 
माँ जैसा प्यार लुटाकर, जीवन अमृत करती है!! 
मन से मानो तो माँ है, अमृतमयी जलधारा! 
जीवन को पोषित करती, पूजे जन संसारा!! 

माँ, कामधेनु गौ माता, हम सबकी भाग्य विधाता! 
तैतिस, कोटि देवता बसते, देवी माँ पोषित दाता!! 
कितने उपकार है करती, जीवन में खुशियाँ भरती! 
पोषित करती है काया, कष्टों को हरती है!! 

चलो गाँव में फिर बस जाये, जीवन स्वर्ग बनाये! 
वृक्ष का रोपण करके हरित, प्रकृति महकाये!! 
न भेदभाव हो कोई, न मन में कडवाहट है! 
ये जीवन हमे मिला है, कुछ नेक काम कर जाये!! 
     श्रीमती रीमा महेंद्र ठाकुर वरिष्ठ लेखिका "
रानापुर झाबुआ मध्यप्रदेश भारत

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