प्रेम राही

ज्यादा न सही भले, थोड़ा प्यार तो करना,
कलमें  बांचें  हैं  हमनें  अहल- ए - दिल  से
इश्क की राह में,तुम थोड़ा एतबार तो करना,,

ज्यादा न सही,,भले कम ही सही तुम प्यार तो करना,,

गर रजा हुई उसकी तो ता उम्र साथ रहेंगे,
न भी हुई तो कोई बात नहीं, हम साथ न होकर भी साथ हो रहेंगे,,

बस तुम उसपर थोड़ा एहतराम करना,
ज्यादा न सही भले थोड़ा ही सही हमसे प्यार तो करना,,

हम टूटकर भला तुमसे कहां जाएंगे,कोई भी पड़ाव हो उम्र का हमें तुम बस अपना पाएंगे।।

हम प्रेम रहा के इस सफ़र पर उम्र भर साथ निभाएंगे,,
  
                              "कुमार"

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