खट्टी मीठी यादों के संग तकरार भरी बातें
कब तू आयेगी तेरी राह देख रही हूं
मेरी खुशी को खुद की ही नजर से बचा रही हूं,,
बार बार घड़ी की और नजर जा रही है
तुझे देखने को आंखें मेरी तरस रहे हैं....
कुछ पुरानी यादें फिर से ताजा होंगे
खट्टी मीठी यादों के संग तकरार भरी बातें होंगे
यादें कुछ जो रुलाएंगे, कुछ हसाएंगे भी,,,
पर सारी यादों से मिलेंगे सुकून भी
बचपन का वो गुड़ा गुड़ी वाला खेल हो या
बारिश में कागज की नाव छोड़ना हो
या तो चुराके आचार खाना हो......
खुसनसिब हूं मैं जो मुझे तेरी जैसी बहन मिली
बहन के साथ एक दोस्त भी मिली
तुझे दर्द होने से हम तो रो पड़ते थे,
पता नही तेरी शादी के दिन हम खुद को कैसे संभाले थे
तेरी छोड़ जाने के बात से आंखों में आंसू भी थे
पर तेरी नई जिंदगी की शुरुवात के खुशी में होठ में मुस्कान भी थे....
तेरी ससुराल चले जाने से मेरी जिंदगी जैसी अधूरी रह गई,,,
तू यकीन नहीं करेगी पर मैं तो कुछ दिन के लिए तेरे बगैर हंसना जैसे भूल सी गई......
आज इतने दिनो बाद तू वापस आ रही है
इंतजार कि घड़ी खत्म हो रही है.......
तुझे गले लगाने को मैं बेकरार हूं,
खुद को संभालने में अब नाकामयाब हूं.....
तेरी राह देखते देखते थक चुकी हूं
इतना भी मत सता जल्दी से आ भी जा
गले लगा कर तुझे थोड़ा रोना चाहती हूं....
वो आंसू खुशी के ही होंगे,
खट्टी मीठी कुछ यादें भी होंगे
उन यादों के साथ तकरार भरी बातें भी होंगे......
बिछड़े हुए दो पंछी फिर से मिल जायेंगे.....
दूर गगन में उड़ते उड़ते प्यार का गीत गाते जायेंगे.......
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित
ज्योतिजयीता महापात्र
ओडिशा
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