सफर जारी है अभी
😊🙏 एक मुसल्सल गजल 😊🙏
तुझी से आशना मेरा तुझी पे ही फना हुआ,
ये एहसास ना कहा हुआ न ही सुना हुआ।(१)
ये महफिलों की रौनकें पुकारती जिसे शमां,
फकत उसी निगाह का मुझे निहारना हुआ।(२)
नज़र नज़र की जुस्तजू बुला रही तुझे यहां,
उसी हसीं सुरूर से मेरा युं सामना हुआ।(३)
सुनो कि अब गले लगा के फासले मिटा हि दो,
ये छत पे तो बहुत ही चांदनी को ताकना हुआ।(४)
किसी तरह जुदा न हों मना तो अब करो नहीं,
फकत यही खयाल रोज ही संवारना हुआ।(५)
लगे मुझे बिना तेरे बसर हो अब जो जिंदगी,
कि जिस तरह किसी सुरों के साथ साज ना हुआ।(६)
पुकार लो मुझे तो अब ना इस तरह सताइए
निगाह का मिला के फिर से क्यों समेटना हुआ।(७)
जाने कहां हवा मुझे उड़ा ले जा रही बता,
इसी डरो में दामनों को यूं लपेटना हुआ। (८)
जो कशमकश नजर में दिख रही हैं बारहा मुझे,
ये दिल की बात लिख के हर दफा सुधारना हुआ(९)
तुम्हें किसी तरह तो ‘लाल’ ये हुआ यकीन है,
मेरे जुनूं से नूर ये तेरा निखारना हुआ।(१०)
मापनी : 1212 1212 1212 1212
🙏🌹रंजन लाल🌹🙏
#तेरेहीइश्कमें
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