टूटते घर की कहानी
उनकी 12 साल की एक खूबसूरत बेटी थी जिसका नाम रूही था।
जबसे रूही समझदार हुई उसने अपने मम्मी पापा को झगड़ते हुए ही देखा था।
दोनों तलाक लेना चाहते थे।समस्या थी कि रूही की जिम्मेदारी कौन लेगा।
रीना का कहना था ,""रूही की जिम्मेदारी तुम सम्भालो और प्रोपर्टी में से आधा हिस्सा मुझे दो।"
जबकि रजत चाहता था कि रूही की जिम्मेदारी रीना ले।
रोज लड़ाई के साथ ही रूही को लेकर भी झगड़ा होता।
आज रूही सो कर उठी ।उसने मम्मी पापा के बेडरूम में झांक कर देखा तो कमरे में सामान बिखरा पड़ा था।पापा ड्राइंग रूम में सो रहे थे।
उसे समझते देर नहीं लगी कि रोज की तरह आज फिर दोनों में झगड़ा हुआ है।
वह स्कूल के लिए तैयार हुई।उसने अपनी गुल्लक से पैसे निकाले और बाहर जाने लगी ।तभी उसकी सरोज आंटी ने आवाज दी ,""रूही बेटा नाश्ता कर के जाओ।'
रूही ने मना कर दिया ,""आंटी आज मन नहीं कर रहा।'"
""अच्छा लंच बॉक्स तो लेती जाओ" कहते हुए सरोज ने उसके बैग में जबरदस्ती लंचबॉक्स रख दिया।
सरोज घर में काम करती थी।वह भी साहब और मेम साहब के रोज के झगड़ों से परेशान थी। जब भी वह काम छोड़ कर जाना चाहती रूही का प्यार और उसकी चिंता पैरों में बेड़ियां डाल देती थी।
दोपहर को रूही के स्कूल से रीना के मोबाइल पर कॉल आई कि रूही हॉस्पिटल में एडमिट है।
रजत और रीना दोनो हॉस्पिटल पहुंचे ।पता चला कि रूही सीढ़ियों से गिर गई थी जिससे उसके सिर में चोट आई है। खून काफी बह चुका था।चोट भी गहरी थी।
डॉक्टर की कोशिशों के बाद भी रूही को नही बचाया जा सका।
सरोज का रो रो कर बुरा हाल था।उसका कहना था कि रजत और रीना की वजह से ही रूही की जान गई है।सरोज काम छोड़ कर चली गई।अब यहाँ रुकने का कोई मकसद नहीं था।
रूही की दादी उसे बहुत प्यार करती थीं।इन झगड़ों से परेशान हो वह रुही को अपने साथ ले जाना चाहती थीं ।पर पति पत्नी ने रूही को नही भेजा।लाचार हो दुखी मन से दादी भी वापस चली गईं।
रूही जानती थी कि सरोज आंटी के अलावा यहाँ कोई उसे प्यार नहीं करता।मासूम मन जिस प्यार को तरसता है वह उसे अपने मम्मी पापा से नहीं मिला।
रूही का तेरहवाँ करने के बाद रीना उसकी अलमारी का सामान देखने लगी।जिसे पहले अपने बच्चे के कमरे में आने की फुरसत नही थी वह आज उसकी अलमारी देख रही थी।
सामानों के बीच उसे रूही की डायरी मिली।रीना पढ़ने लगी
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"मम्मी मैं आपको बहुत प्यार करती हूँ ।पर आप नहीं करतीं ।तभी आप मुझे पापा के पास छोड़ना चाहती हैं।।आप राजमा बहुत अच्छा बनाती थीं।मैं जब भी आपसे बनाने के लिए कहती,आप कहतीं मेरे पास टाइम नहीं है।जो खाना हो सरोज से बनवा लो।
बुआ के घर जब गई थी वहाँ देखा कि बुआ निम्मी को कितना प्यार करती थीं।उसे मेरी प्यारी बिटिया कह कर बात करती थीं ।आपने आज तक मुझे "मेरी प्यारी बिटिया" नहीं कहा। आप मुझे प्यार नहीं करती हैं।
दादी मुझे प्यार करती थीं।वह मुझे अपने साथ ले जाना चाहती थीं लेकिन आपने नहीं जाने दिया और दादी चली गईं।"
"पाप मैं आपको बहुत प्यार करती हूँ लेकिन आप मुझे प्यार नहीं करते।मुझे लेकर आप और मम्मी झगड़ते रहते हो।
मैं कभी आपसे कहती,""पापा आप मुझे आइसक्रीम खिलाने ले चलिये ""तो आप कहते मेरे पास फालतू काम के लिए टाइम नहीं है।""
जब मैं मामाजी के घर गई थी मामा और मामी बच्चों को घुमाने ले जाते उन्हें आइसक्रीम खिलाते और सब मिलकर खुश रहते थे।कितना अच्छा लगता था।आप दोनों तो मुझ से बात भी नहीं करते हो ।'"
""सरोज आंटी आप ही हैं जो मुझे प्यार करती हैं,मेरा ध्यान रखती हैं।मुझे गोदी में लिटा कर बात करती हैं।मैं आपके पास आकर ही आपके गले लग कर रो लेती हूँ।मैं आपको बहुत प्यार करती हूँ।मम्मी पापा को मेरी चिंता नहीं है।वह मुझे एक दूसरे को सौंप देना चाहते हैं।मैं उनके लिए बोझ हूँ ।""
डायरी पढ़ कर रीना सिर पकड़ कर बैठ गई।रजत उसके पास ही खड़े थे।उसने डायरी रजत को पकड़ा दी। रजत भी उसे पढ़ कर अवाक रह गए।
उन दोनों को अब समझ आया कि उन्होंने आपसी लड़ाई में बच्ची को मोहरा बना लिया था।रूही की मृत्यु दुर्घटना से नहीं हुई थी उसने दुखी होकर आत्महत्या कर ली थी।
पति पत्नी की अति महत्वाकांक्षा से एक परिवार और बिखर गया था।
रेनु सिंह
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