तेरा मेरा साथ



मेरे अंतर की धड़कन हर पल मुझसे यह कहे।
इस जन्म से हर जन्म तक तेरा मेरा साथ रहे।।

यूँ तो आए कितने चेहरे पर कोई चेहरा जचा नहीं।
जब से देखी तेरी सूरत फिर कोई सपना रचा नही।।

क्या कहती हो सखी बताओ जीवन पथ पर चलते हैं।
छोड़ पुरानी इस दुनिया को नए ख्वाब फिर बुनते हैं।।

एकदूजे के साथ चलें हम एकदूजे की बात रहे।
इस जन्म से उस जन्म तक तेरा मेरा साथ रहे।।

सकल धरा पर तुम से अच्छा साथ नहीं अब दिखता।
सारी दुनिया भ्रमण करके तुम पर ही है मन रुकता।।

बे-सुध से हम रहें हमेशा कब आओगे तुम बतलाओ।
कितनी और रहेगी प्रतिक्षा अब तुम हमको समझाओ।।

साथ तुम्हारे चलने को मेरा मन विचलित रहे।
इस जन्म से हर जन्म तक तेरा मेरा साथ रहे।।

नाम - विक्रांत चम्बली
पता - ग्वालियर (मध्य प्रदेश)

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