⚘कैसे ना याद आएगी।⚘


खुशबु बनके कुछ यूँ बिखर जाएगी,
हर शय, हर खयाल में नजर आएगी। 
दिलों में रहना तो शौक है हमारा, 
कैसे ना तुम्हें हमारी यूँ याद आएगी 

ज़रा कोशिश तो कर अलग होने की, 
हर तरफ मेरी परछाई नजर आएगी। 
पढ़ के देख लेना कभी भी तुम बेखौफ, 
जिंदगी मेरी खुली किताब बन जाएगी। 

ख्वाबों के चमन में जो छुपा के बैठे हो, 
खुशबु को उसकी कैसे कैद कर पायेगी। 
क्या ज़रूरी तुम्हें आईने में संवरने की, 
मेरे लफ़्ज़ों में तेरी तस्वीर दिख जायेगी। 

ये जो कशमकश की सिलवटें माथे पर, 
गर कर लो ऐतबार, यूँ ही उतर आयेगी। 
आजमा के देख ले किसी भी मोड़ पर, 
हर जगह हमें साथ अपने खड़ा पायेगी। 

🙏🙏😊😊🙏🙏
स्वरचित व मौलिक 
रंजन लाल 
इन्दौर, मध्यप्रदेश

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