यह मेरा हिंदुस्तान है।



मेरे देश की इस दुनिया में अलग सी पहचान है।
यहाँ सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा हिंदुस्तान है।।

अनादिकाल से भारत ऋषियों की तपोभूमि रहा।
इतिहासों के पृष्ठों ने भारत को स्वर्ग खग कहा।।

यहां हर बच्चे में राम बसें हर बाला सीता सी।
ऋषियों की वाणी यहां लगती भगवद गीता सी।।

इस धरा पर मेरे देश का एक अलग सम्मान है।
यहाँ सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा हिंदुस्तान है।।

मेरे देश की इसी धरा पर चंदा सी तरूनायी थी।
मिट गईं वीरांगनायें किंतु आन पर आँच ना आई थी।।

मेरे देश के बालक भी सिंहो से लड़ जाते थे।
सब कुछ खोकर भी क्षत्रिय अपना धर्म निभाते थे।।

मेरे देश की इस मिट्टी के कण-कण में भगवान है।
यहाँ सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा हिंदुस्तान है।।

नाम - विक्रांत चम्बली
पता - ग्वालियर (मध्य प्रदेश)

Comments

Popular posts from this blog

आखिरी अदालत

आज की मांग

आवारा बादल (भाग 30) प्रयास