कान्हा



ब्रजमण्डल की भूमि हमारी।
लगती हमको सबसे प्यारी।।

ब्रज माटी में नारायण बालक बनकर खेले थे।
उनकी छवि देखने को गोपियों के मेले थे।।

सारी दुनिया वाले उनको नारायण बतलाते थे।
हमारे ब्रजमण्डल में वो कान्हा कहलाते थे।।

कभी किसी ने छलिया कभी माखन चोर कहा।
कभी जगतगुरु तो कभी रणछोड़ कहा।।

नीति, न्याय, कर्म योग का था सबको संदेश दिया।
युद्ध भूमि में खड़े हो गीता का उपदेश दिया।।
नाम - विक्रांत राजपूत
पता - ग्वालियर (मध्य प्रदेश)

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