न मंजिल........न पता



न मंजिल की खबर न राह का पता 
बस चलता ही जा रहा अपनी धुन मे सदा 
मिल जाएगी मगर ये यकीं है मुझे
अगर इस सफर मे तू साथ दे दे जरा

मैं राही हूँ बस पल दो पल का 
एक ऐसे सफर पर निकल पड़ा 
न मंजिल की खबर न राह का पता 
बस चलता ही जा रहा अपनी धुन मे सदा

मैं चलूँगा तो लोग भी मिलेंगे 
और ये कारवां बढ़ता जाएगा 
राब्ता राब्ता ही सही मगर 
ये सफर यूँ ही चलता जाएगा
बस यही सोचकर मैं चलता रहा 
न मंजिल की खबर न राह का पता 
बस चलता ही जा रहा अपनी धुन मे सदा


मुझे भी हर पल का एहसास है 
मंजिल शायद कहीं आस पास है 
ये जिंदगी का शाम कब ढल जाएगा 
और मेरा वक़्त भी एक दिन संवर जाएगा 
बस नदी की धार सा बहता रहा 
न मंजिल की खबर न राह का पता 
बस चलता ही जा रहा अपनी धुन मे सदा


लोग मिलेंगे भी लोग बिछड़ेंगे भी 
कभी तो फूलों सा निखरेंगे भी 
बस एक दिन ये सफर थम जाएगा 
बस मंजिल पर नजर जम जाएगा 
बस साथ मिलता रहे तुम्हारा सदा 
न मंजिल की खबर न राह का पता 
बस चलता ही जा रहा अपनी धुन मे सदा
मुकेश लखनवी

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