बागों में बहार छाई सजना
देख पिया सावन की रमझोल
बागों में बहार छाई सजना
मिलन की रूत आई सजना
शीतल चली पुरवाई सजना
फिर तू क्यों ना आया हरजाई सजना।
सावन के इस मौसम में
सावन की प्यासी अंखियां
देख पिया कलि खिली फूल बनी
फूल बन महकने लगी गुलाब बन कर
रस के प्यासे भंवरे गुंजन करने लगे
फूल में ऐसे रमे स्व को ही खोने लगे
कोयल सावन गीत गाने लगी
दिल की किताब पढ़
मोहब्बत की दास्तां सुनाने लगी
मोर ठुमक ठुमक नाचने लगे
मोरनी को रिझाने लगे
घोंसलों में दूबके परींदे
पंख फैलाए आसमां में उड़ने लगे
मखमली नव पात पात
नव डालियों पर चोंच लड़ाने लगे
देख देख कर नजारे पिया मेरा मन
कस्तूरी मृग बन डोले वन उपवन।
देख पिया सावन की रमझोल
बागों में बहार छाई सजना
मिलन की रूत आई सजना
शीतल चली पुरवाई सजना
फिर तू क्यों ना आया हरजाई सजना।
सावन के इस मौसम में
सावन की प्यासी अंखियां
देख पिया सूरज छुप गया बादलों में
चांद भी शरमाने लगा
तारों में भी मच गई होड़
टूट टूट धरती की तरफ लगाई दौड़
दो प्रेमी दरिया किनारे
चुपके-चुपके मिलने लगे
देखकर मधुर मिलन
सदियों से ठहरा सागर
प्रेम बूंदों में सिमट बादल बना
अगाध प्रेम दिल में लिए फूट फूट कर रोने लगा
टिप टिप बारिश सा
कल कल झरना बन बहने लगा
कल था जो सागर
आज नदी बन स्व अस्तित्व से पुनः मिलने लगा
देख देख कर नजारे पिया मेरा मन
कस्तूरी मृग बन डोले वन उपवन।
देख पिया सावन की रमझोल
बागों में बहार छाई सजना
मिलन की रूत आई सजना
शीतल चली पुरवाई सजना
फिर तू क्यों ना आया हरजाई सजना।।
पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏 💐💐
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