खेल क्रिकेट का


खेल  यह बल्ले और गेंद का,
हमको कितना है सिखलाता।
बल्ले   से  गेंद  तुझे   खेलना,
और  गेंद  बल्ले  पर  फेंकना।।

दूर  फेंक  गेंद  को बल्ले से,
तुझे अपना बल दिखाना है।
गेंद  फेंककर   ठीक निशाने,
कौशल भी तुम्हें  दिखाना है।।

रहकर  बल्लेबाज  के पीछे,
सीमा  में  उसको रखना है।
कभी क्षेत्ररक्षण तुझे करके,
अतिक्रम से उसे रोकना है।।

क्रिकेट  के इस खेल में  तुझे,
बल्ले से शौर्य दिखाना होता।
गेंद  फेंक  सीमारक्षण करके,
सव्यसाची- सा  बनना होता ।।

जिंदगी एक खेल क्रिकेट का,
तुमको संभलकर खेलना  है ।
अति  तेज  तुमको है दौड़ना,
गलत  नहीं पकड़ा  जाना है।।

जीवन  के इस क्रिकेट खेल में ,
तुझको  सव्यसाची  है  बनना।
बल, बुद्धि और कौशल से तुझे,
विजयश्री  का  वरण  है  करना ।।


    -पेरी सूर्यनारायण मूर्ती "दिवाकर "


(यह मेरी मौलिक रचना है सर्वाधिकार सुरक्षित)
(मुखचित्र गूगल से साभार)

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