मस्त श्रावण में
मैं घूमता फिरूँ मस्त गगन में
मुझे प्यार हुआ मस्त सावन में
मदमस्त पवन चले मस्त गगन में
फूल भी खिल उठें मस्त चमन में
मैं भीगता फिरूँ बारिश की फुहार में
हर वक्त खोया रहूँ बस तुम्हारे प्यार में
मैं झूला झूलूँ तुम्हारे साथ में
मैं मल्हार गाऊँ तुम्हारे प्यार में
मैं घूमता फिरूँ मस्त गगन में
मुझे प्यार हुआ मस्त सावन में..........
पवन शर्मा
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