बिखरते_अहसास

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एक दूजे के दिलों का अहसास नहीं हम,
प्रेम से ही बुझ जाए वो प्यास नहीं हम,

रेल की पटरी सी बन गई जिन्दगी अपनी
साथ रहकर भी क्यूं देखो साथ नहीं हम।

जिन आंखों में बसती रही प्यार की कशिश
 गले लगकर भी नजर का विश्वास नहीं हम।

सबकी आंखों में दो जिस्म एक जान बने है
खुद की नजरों का वो हंसीं अरमान नहीं हम।

चल कदम फिर साथ बढ़ाएं पहले की तरहा,
अरे कल ही की तो बात है इतिहास नहीं हम।

ये फासले हैं सिर्फ खामोशी की वजह से हैं,
चलें फिर कुछ बात करें बेआवाज़ नहीं हम।

🌹रंजन लाल🌹
#तेरेहीइश्कमें

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