रिमझिम फुहारें प्रीत की⚘



मेरे अन्तर्मन को छुआ है,
सरगम सी बिखर रही है,
रिमझिम फुहारें वो प्रीत की,
मेरे मन पर बरस रही है।
कोई आजकल खुद से भी ज्यादा
 क्युं इतना हमें प्यार कर रही है। 

हर पल मेरी निगाहें ढूंढा करें,
वो प्यार बन कर आया है,
एक मीठी सी कसक लिये आज,
मन के भीतर जा समाया है।
आंख मिलने से बचती रही और
चोरी से वो आँखे चार कर रही है।
कोई आजकल खुद से भी ज्यादा
 क्युं इतना हमें प्यार कर रही है।

बन्द आंखो में साफ नज़र आता मुझे,
आंख खुलते ही धुआँ  सा होता है,
तन्हाई में जो नज़र आता है हर सूं 
बस भीड़ में ही तन्हा सा होता है।
सुबह की भीनी महक सी कहीं,
हर पल मन को सरोबार कर रही है,
कोई आजकल खुद से भी ज्यादा
क्युं इतना हमें प्यार कर रही है।
🙏⚘ रंजन लाल⚘🙏

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