हम थोड़े बदनाम हैं।



युं मेरे शब्दों में अपना जीवन जीते हैं,
खुशी में खुश, गम में गमगीन होते हैं।
तुममें हममें बहुत फर्क नहीं है यारों,
क्युं हमें लोग अजीब नजरों से देखते हैं।
हम थोड़े से बदनाम हैं इस जहाँ में कि,
बेहिचक हम हाले दिल बयां कर देते है।

खयाल सबके दिलों में रहते हैं साहब,
अरमान वहाँ पर भी सुलगते हैं साहब।
बस, आप शराफत का चोला पहने हुए,
खयालों को दिल में छुपा कर रखते हैं।
हम थोड़े से बदनाम हैं इस जहाँ में कि ,
बेहिचक हम हाले दिल बयां कर देते है।

लफ्ज़ों को छाने, पर्दा नहीं रहा अब तो,
परखे जो, वो आइना नहीं रहा अब तो,
हमारे शब्दों मे हमारा जीवन ना खोजिये
हम तो यूँ ही बहुत से खयाल कह देते हैं।
हम थोड़े से बदनाम हैं इस जहाँ में कि,
बेहिचक हम हाले दिल बयां कर देते है।

वो दिल कहां, जिसे कोई अच्छा ना लगे
सामने उनके आते ही, बैठने सा ना लगे
ये और बात है दिल ही दिल में अक्सर,
सभी घुटते हुये मन मसोस कर रहते हैं।
हम थोड़े से बदनाम हैं इस जहाँ में कि,
बेहिचक हम हाले दिल बयां कर देते है।
😊🙏⚘रंजन लाल⚘🙏😊

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