लिंग भेद


चाहे हो कोई महाग्रंथ 
या हो कोई अनुच्छेद 
या हो कोई गीता पुराण 
या हो कोई भी वेद 
सर्वत्र वर्जित है लिखा हुआ 
केवल एक लिंग भेद 
केवल एक लिंग भेद 
लड़का लड़की मे भेद क्यूँ 
दोनों ही धरा की जरुरत हैं 
एक चलाता घर समाज 
एक ममता की मूरत है 
भला बताओ अगर न हो
इनमे से कोई एक 
तो वंशावली कैसे चल पाएगी 
फिर नहीं होगी कोई लक्ष्मी बाई 
जो अपना राज्य बचाएगी 
फिर नहीं होगी कोई इंदिरा 
जो देश को आगे ले जाएगी 
फिर नहीं होगी कोई मदर टेरेसा 
जो सेवा भाव दिखलाएगी 
अगर तात्या टोपे ने 
लिंग भेद किया होता 
तो किस लक्ष्मीबाई की 
गौरव गाथा गाते हम 
और अगर लिंग भेद होता 
मदर टेरेसा का तो 
ऐसा सेवा भाव कहाँ पाते हम 
अगर लिंग भेद होता किरण बेदी का
तो बहादुर सख्शियत कहाँ मिलती 
अगर लिंग भेद हो किसी नारी का 
तो वीरों की गाथा कैसे बनती  
अगर बात मेरी समझ आ जाए 
तो लिंग मे कोई नहीं भेद है 
और अगर नहीं समझ पाए  हो तो
"लखनवी" हमें बहुत खेद है 

मुकेश लखनवी

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