काश की ऐसा वक़्त हो
काश की ऐसा वक़्त हो कि, देश मे खुशहाली आ जाए
मै आऊं तुम्हारे पास तो ईद हो, तुम आओ मेरे पास तो दिवाली आ जाए
काश की ऐसा वक़्त हो........
आपस मे कोई रंज़िश न हो, हो हर तरफ मुकम्मल माहौल
मेरे दर पर अब न कोई सवाली आ जाए
काश की ऐसा वक्त हो........
आपसी रिश्तों मे मिठास हो, हर खुशी का लम्हा सबके पास हो
मेरे घर पर, तुम्हारे घर से मोहब्बत की थाली आ जाए
काश की ऐसा वक़्त हो........
वो वक़्त आएगा जब होगा हर तरफ अमन और चैन,
कहीं दंगा न हो मजहब के नाम पर और बहाली आ जाए
काश की ऐसा वक़्त हो........
कभी आपस मे न टकराए फिर कोई
भाईचारा हो और पास आ जाए फिर कोई
तुम बोलो राम राम और मेरी जुबां पर या अली आ जाए
काश की ऐसा वक़्त हो.........
मैं जानता हूँ ये काश काश ही रह जाएगा
ये राजनीति रूपी सर्प डस रहा है और डसता ही रह जाएगा
कुछ तुम्हारी तरफ होंगे जिन्हे ये इखलाख पसंद नहीं
और कुछ हमारी तरफ होंगे जिन्हे ये मेरी बात पसंद नहीं
आपका मुकेश "लखनवी"
Comments
Post a Comment