--- बेबसी---


मै बेबस हूँ ये सब देखने के लिए
रोते हुए रोज यूं मुस्कुराना तेरा
गुजरते हर इक पल के एहसास से
सूखे पत्तों सा यूं थरथराना तेरा!
सूखे ठूठों को जिन्दा रखने के लिए
बेवजह लहू अपना पिलाना तेरा
औरों को रोशन करने के लिए
घुट-घुट के यूं जलते जाना तेरा!
इक हल्की सी रोशनी की चाह मे 
घुप अंधेरों मे यूं डूब जाना तेरा
बीते पलों के लौटने की आस मे
हर आहट पर यूं चौँक जाना तेरा!
मीठे झरने को पाने की झूठी चाह मे
तपते रेत पर यूं चलते जाना तेरा
मै जानता हूं कि मेरा दोष क्या हैं
फिर भी मुझको 'निर्दोष' कह जाना तेरा!
सूखे पत्तों सा यूं थरथराना तेरा
हर आहट पर यूं चौँक जाना तेरा !!
सतीश निर्दोष
रेवाड़ी (हरियाणा )

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