ये कैसा मौसम आया




गाये मेघ मल्हार ये कैसा मौसम आया, 
बरसे मोती के हार ये कैसा मौसम आयाl

सातों रँग में रँगी सुहागन धरती रानी, 
मान ली मनुहार, 
ये कैसा मौसम आयाl

ऐसी जवानी आयी माने रीति- नीति न कोई, 
उमड़े- डूबे नदी किनार,
ये कैसा मौसम आयाl

तन की लगी हेठ, गाँठ मन की सुलझाई, 
विरह की राई हुई पहाड़, 
ये कैसा मौसम आयाl

झंकृत मन की समेट सके न मन के माँझे,
बौराया हृदय सितार, 
ये कैसा मौसम आयाl 


 -निगम झा 
स. उप- निरीक्षक
स. सी. बल
सिलीगुड़ी

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