उदासी भरे दिन कभी तो ढ़लेगें ....😇😇😇

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कहां तक मेरे मन को अंधेरे छलेगें 
मेरे उदासी भरे दिन कभी तो ढलेगें 

कभी सुख कभी दुःख यही जिंदगी है 
ये पतझड़ का मौसम घड़ी दो घड़ी है
नये फूल फिर डगर में खिलेंगे
मेरे उदासी भरे दिन कभी तो ढलेगें

भले ही कितना तेज हवा का झोका हो
मगर अपने मन में तु रख ये भरोसा 
जो बिछड़े थे सफ़र में वो फिर तुझे मिलेंगे 
मेरे उदासी भरे दिन कभी तो ढ़लेगें 

कहें कोई कुछ भी मगर सच यही है
लहर प्यार की कहीं जो उठ रही है
उसे एक दिन किनारे तो मिलेंगे
मेरे उदासी भरे दिन कभी तो ढलेगें

आपका:- अफ्फान हाजिपुरी 

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