उल्टा चोर कोतवाल को डांटे


शैली :- अवधी 

उल्टा चोर कोतवाल को डांटे 
वहिकी बटवा क रुपया लोगन मे बाँटे 

अउर जे ज्यादा बत्तमीजी करै तौ 
धर देय वहुक दुइ चार चमाटे 

कउन जमाना आई गइल बा 
ई देखा उ अब केहुक न सांटे 

अउर जे समझावै उ जूता पावै 
उल्टा चोर कोतवाल को डांटे

आपन कौनो सुध बुध नाही  
जे सिखावै तौ करै मनाही
 
चाहे पैर मे लगे हों काटें   
उल्टा चोर कोतवाल को डांटे

छोटी छोटी बात म मुँह फुलावै 
झगड़ा करै औ गारी पावै
 
दिल मे बना लेता है गाठें 
उल्टा चोर कोतवाल को डांटे 

 

मुकेश लखनवी

Comments

Popular posts from this blog

आखिरी अदालत

आज की मांग

आवारा बादल (भाग 30) प्रयास