क्या बताएं हम तुम्हें कितना चाहते हैं

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क्या बताएं हम तुम्हें कितना चाहते हैं
बस आसमान में तारे जितना चाहते हैं
प्यार की कोई सिमा नही होती
महबूब के अलावा आशीको की कोई दुनिया नहीं होती

प्यार इक इबादत है
प्यार इक पुजा है
जो सबको होता है
कोई छुपाता है
कोई बताता है
सच्चा प्यार तो यारों
नसीब वालों को ही मिल पाता है
क्या बताएं हम तुम्हें कितना चाहते हैं
बस खुद से ज्यादा तुम्हें चाहते हैं

प्यार इक रोग है
जिसका रोगी सारा संसार है
इसके बिना रह पाना
इक पल भी दूसवार है
प्यार की भाषा जो समझ गया
वो इन्सान महान है
जो ना समझ सका वो नादान है
क्या बताएं हम तुम्हें कितना चाहते हैं
बस खुद से ज्यादा तुम्हें चाहते हैं

आपका :- अफ्फान हाजिपुरी

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